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बैंकिंग सिस्टम मुद्रा कैसे छापता है ?

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अगर आपके पास 10 लाख रुपए हैं । तो आप अधिक से अधिक 10 लाख रुपए ही उधार दे सकते हो । आप किसी को 11 लाख रुपए उधार नहीं दे सकते ।लेकिन बैंकिंग में यह प्रतिबंध लागू नहीं होता । इसको हम एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। सन 2018 के अंत तक भारत में कुल मुद्रा लगभग 20 लाख करोड रुपए चल रही थी। और सारे बैंकों ने मिलाकर लगभग 60 लाख करोड रूपया उधार दे रखा था। इसका अर्थ यह हुआ कि बैंकों के पास अधिक से अधिक 20 लाख करोड रुपए की मुद्रा थी। फिर सारे बैंकों ने मिलकर 60 लाख करोड रुपए कैसे उधार दे दिए । इसी को बैंक द्वारा मुद्रा छापना कहा जाता है। देश में 2 तरीके की मुद्राएं चलती हैं। एक तो जो सरकार ने छपाई होती हैं ।और दूसरा जो बैंकों ने इस मुद्रा के अतिरिक्त जो लोन दिए होते हैं ।वह भी एक तरीके की मुद्रा ही है। इसको virtual करंसी कहते है । इससे आप वह सब काम कर सकते हैं जो सरकार द्वारा प्रिंट की गई मुद्रा से कर सकते हैं । अगर सरकार बैंकों पर यह रोक लगा दे। कि जितनी बैंक के पास मुद्रा है । बैंक उससे अधिक लोन नहीं दे सकता। तो देश की आम जनता के बारे नियारे हो जाएं । उपरोक्त उदहारण में सरकार लगभग 40 लाख कर...

क्या पूंजीवादी बैंकिंग सिस्टम में आपका पैसा सुरक्षित है

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पूंजीवादी बैंकिंग सिस्टम में आप के पैसे से कैसे खेला जाता हैं उसको   आज समझने का प्रयास करते हैं | अगर आप बैंक से 10 लाख रूपए का HOUSING लोन लेने जाते हो | तो बैंक कम से कम 20 लाख की जमीन गिरवीं रखेगा | पांच लाख आपको अपने पास से भी लगाने के लिए कहेगा | इस तरह बैंक के पास 35 लाख के प्रॉपर्टी गिरवीं रखने पर आपको बैंक 10 लाख रूपए का लोन देगा | हाउसिंग लोन के केस में बैंक आपकी तीन साल की RETURN , VALUATION REPORT , NON ENCUMBRANCE CERTIFICATE ,Legal Opinion , Map passed By MC आदि DOCUMENTS मांगेगा | हो सकता है इनता सब कुछ देने के बाद बैंक फिर भी हाउसिंग लोन देने से इनकार कर दे | अब आप उसी बैंक में , उसी मेनेजर के पास जाईये और उसी से 10 लाख का कार लोन मांगे | तो वह फटाफट 10 लाख रूपए का लोन आपको दे देगा वह भी बहुत थोड़े डॉक्युमेंट्स पर । कार लोन आपको बिना किसी जमीन आदि गिरवी रखने के आसानी से एक दो दिन मेहो जाता है । यदपि 10 लाख के कार की कीमत शो रूम से निकलते ही 8 लाख की रह जाती है ।क्योकि हाई एंड गाडी लोग केवल स्टेटस सिंबल के लिए लेते है | इसलिए हाई एंड सेकंड हैण्ड गाडी की कीमत ब...
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जीडीपी की सच्चाई ---- मान लो एक शहर में 1000 सब्जी विक्रेता है। वह 1 साल में सब्जी बेचकर 2-2 लाख कमा लेते हैं ।लेकिन वे देश की जीडीपी में कोई भी योगदान नहीं देगें क्योंकि उनकी आय सरकार की किसी बही खाते मे दर्ज नहीं होती। मान लो अगर उसी शहर में एक Reliance Fresh की दुकान खुलती है ,जो कि सब्जी भी बेचती है । धीरे धीरे वह दुकान 1000 सब्जी वालों को खत्म कर देती है ,और साल में 2000 लाख रुपया कमा लेती है ।तो देश की जीडीपी 2000 लाख रुपया बढ़ जाएगी। ---- इस तरह हमने देखा की कैसे अगर बड़ी पूंजीवादी कंपनीज़ आमदनी बढ़ती है ,तो देश की जीडीपी ही बढ़ जाएगी ,और अगर गरीब की आमदन बढ़ती है तो जीडीपी कम हो जाएगी। --- यह जीडीपी का प्रोपेगेंडा पूंजीवादी Information Warfare की आंकड़ों की बाजीगरी है ,और कुछ भी नहीं। पूंजीवादी कंपनीज की आमदन के बढ़ने को विकास ,GDP Growth कहते हैं । --- पूंजीवादी व्यवस्था, वह व्यवस्था है जो कि देश के सारे संसाधन और धन लूटकर चंद व्यक्तियों तक सीमित कर देती है। इसके विपरीत सनातन अर्थव्यवस्था यह यकीनी बनाती है कि देश के संसाधनों और धन की समान बां...

पूंजीपति बैंकिंग सिस्टम से होता विकास

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नमस्कार मित्रों आज हम चर्चा करेंगे कि  पूंजीवादी बैंकिंग  सिस्टम से कैसे विकास हो रहा है। बैंकिंग असल में करती क्या है ?इसके लिए मैं आपको एक उदाहरण देकर समझाना चाहूंगा । मान लो एक देश में 10000  चावल निकालने की  सनातन चक्कियां  है। मान लो इन चक्कियों  के मालिकों ने वर्ष भर में मेहनत करके 250000 रुपया कमाया । और यह कुल 10000X250000= 250 करोड़ बैंकों में जमा करवा दिया । अब यह बैंकिंग सिस्टम करता क्या है कि यह ढाई सौ करोड़ किसी बड़ी पूंजीपति चावल निकालने वाली कंपनी XYZ LTD को उधार दे देता है ।जिससे  चावल निकालने का बहुत बड़ा प्लांट लगा सके ।अब यह XYZ लिमिटेड इन 250 करोड़  रूपए से इन 10000 चक्की वालों को खत्म कर देगी । अब सोचने वाली बात यह है कि यह ढाई सौ करोड़ रूपया किनका है उन  चक्की वालों का जिन्होंने इस पैसे को  बैंको में जमा करवाया और बेरोजगार कौन हुए वहीं चक्की वाले जिन्होंने यह रुपया बैंकों में जमा करवाया। पहले जो ढाई सौ करोड रुपए का मुनाफा 10000 लोगों को होता था वह अब एक पूंजीवादी कंपनी को होगा । खाने के लिए पहले ह...