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स्वदेशी आयुर्वेदिक दंत मंजन और पूंजीवादी रसायनिक पेस्ट

1 .अगर आप रसायनिक पेस्ट जैसे कोलगेट पेप्सोडेंट के स्थान पर घर में बना आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं क्योंकि आयुर्वेदिक दंत मंजन में 30 प्रकार की जड़ी बूटियों का प्रयोग होता है यह जड़ी बूटियां विभिन्न प्रकार के पौधों और वृक्षों से से प्राप्त होती हैं | 2. अगर आप आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप किसानों को खुशहाल करते हैं क्योंकि यह जड़ी बूटियों किसी किसान के खेत से ही आएंगी। दूसरी तरफ अगर आप रसायनिक पेस्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो इनमें किसी की जड़ी बूटी का प्रयोग का प्रयोग नहीं होता रासायनिक पेस्ट में में प्रयोग होने वाले केमिकल जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट आदि बड़े बड़े पूंजीपतियों की खदानों से आते हैं । 3. आपके आयुर्वेदिक मंजन के मंजन के प्रयोग करने के कारण किसानों को विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियां जैसे नीम तुलसी आदि बीजनी पड़ेगी ।जिससे बहुत सारे जीव जंतुओं का संरक्षण होगा जोकि इन विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों पर निर्भर रहते हैं। 3. आयुर्वेदिक मंजन घर में बनाने पर आप प्लास्टिक का कचरा काम पैदा करते हैं । 4 . घर में बने हुए आयुर्...

क्यों सूख गया अराल सागर

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क्यों सूख गया अराल सागर  ----------------------- उज्बेकिस्तान में एक सागर था और अराल  ।1950 के दशक में एक कृषि विज्ञानिक ने सोचा कि अराल सागर के आसपास विकास किया जाए। तो उसकी सलाह पर अराल सागर को जो नदियां पानी देती थी , उनके बहाव को मोड़कर वहां पर कपास और धान की फसल को उगाए जाने लगीं। धीरे धीरे अराल सागर में पानी की कमी होने लगी और आज की तरीख में अराल सागर बिल्कुल सूख गया है अराल अब पानी के स्थान पर सिर्फ नमक और रेत बची है। जो वहां पर लगातार उड़ती रहती है। इस विनाश को विकास का नाम देकर आपके आगे परोसा जा रहा है ।क्या आप भी अपने क्षेत्र में ऐसा ही विकास चाहते हैं,  इस तरह देखा आपने कि कैसे  आजकल की पूंजीवादी खेती के कारण एक पूरे का पूरा सागर  सूख सकता है । भारत में भी यही  तरीके की पूंजीवादी खेती होती है जिसमें एक स्थान पर केवल एक ही फसल को लगातार किसान को भी बीजने पर मजबूर किया जाता ।

सनातन मिश्रित खेती और आज की पूंजीवादी खेती

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नमष्कार मित्रों आज हम चर्चा करेंगे ।कि कैसे सनातन मिश्रित खेती पूंजीवादी खेती से हरेक पैमाने पर अच्छी है ।पूंजीवादी खेती की तुलना में मिश्रित खेती किसान के लिए भी अधिक उपयोगी है ।और उपभोक्ता के लिए भी अधिक उपयोगी है। हम चर्चा करेंगे कि क्यों और कैसे पूंजीवादी खेती के कारण किसान केवल और केवल सरकार और पूंजीवादी कम्पनीओं पर निर्भर हो रहा है। और मिश्रित खेती किसान को  कैसे आत्महत्या से  बचा सकती है। और मिश्रित खेती से उपभोक्ता को कैसे सही दाम पर रसायन रहित उत्पादन मिल सकता है | आजकल जो खेती की जा रही है। उसमें एक स्थान पर केवल एक ही तरह की फसल उगाई जाती है ।जैसे कि पंजाब में केवल धान और गेहूं की फसल ही उगाई जाती है ।पूंजीवादी खेती का मूल मंत्र है ।कि किसान अपनी सारी की सारी फसल बाजार में बेचे ।और अपनी जरूरत का सारा समान बाजार से खरीदे ।जैसे कि अगर किसान धान और गेहूं बेचता है। तो उसको सब्जी,दालें,सरसों का तेल,मूंगफली,ज्वार बाजरा,मक्की आदि बाजार से खरीदने पड़ते हैं ।जबकि मिश्रित  खेती में किसान अपने घर की जरूरत का अधिकतर समान जैसे दाल,सब्जी आदि खुद ही बीजता था । और जो फसल अध...