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क्या allopathy में कॅरोना वायरस का इलाज संभव है ?

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आपकी जानकारी के लिये बता दूं । एलोपैथी में केवल बैक्टेरिया द्वारा उत्पन्न बीमारियों का इलाज है वायरस द्वारा उत्पन्न बीमारियों का नहीं । कॅरोना बैक्टेरिया जनित बीमारी नहीं है बल्कि वायरस जनित बीमारी है । एलोपैथी में वायरस के case में सिर्फ symptoms  का इलाज करती है वायरस का नहीं । जैसे वायरल फीवर में कारण वायरस है बुखार symptom है । केवल बुखार की दवाई दी जाती है इतने में आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस को मार देती है और आप बच जाते हो । इसलिये जो एलोपैथी के हॉस्पिटल कॅरोना वायरस के इलाज का दावा कर रहें हैं वह झूठ बोल रहें है । आपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करें । यही कॅरोना वायरस का इलाज है । तभी कॅरोना वायरस से केवल वोही लोग अधिक मर रहें हैं जो   बुजर्ग हैं  ।कॅरोना वायरस का केवल एक इलाज है वो है अपने शरीर की immunity को बढ़ा दिया जाए । आयुर्वेद में कभी वायरस को सीधा नही मारा जाता आपके शरीर की immunity को बढ़ाया जाता है । आपका शरीर अपने आप वायरस को मार देता है । इसलिये आयुर्वेद को प्रतिदिन नई नई दवाईयां नहीं खोजनी पड़ती। जबकि allopathy में हरेक वायरस...

सनातन और विज्ञान क्या है ?

सनातन और विज्ञान क्या है ? ------------ जिसमें निम्नलिखित तीनों विशेषताएं है वो ही सनातन है । यही विज्ञान की भी सही परिभाषा है । 1. जो सच है अर्थातजो आज भी उतना ही कारगर है जितना आज से लाखों साल पहले था और आज से हज़ारों साल बाद भी उतना ही कारगर रहेगा अर्थात जो निरंतर है । 2. जो निर्विकार है जिसमे कभी कोई विकार नही उत्पन्न नही हो सकता। 3. जो पूर्णतय: प्राकृतिक है जो प्रकृति को किसी भी तरह हानि नहीं पहुँचाता । इन तीनो पैमानो पर जो चीज़ खरी उतरती है वही विज्ञान है और सनातन है । उदहारण के लिये आयुर्वेद सनातन है , विज्ञान है । 1. आयुर्वेद आज भी उतना कारगर है ,जितना आज से लाखों साल पहले था । दूसरी तरफ 1945 में एलोपैथी की जान कहे जाने वाले पहले एंटीबायोटिक पेन्सिलिन का अविष्कार हुआ । जिसका प्रभाव 5 वर्ष तक रहा । फिर टेट्रासाइक्लिन जोकि एक एंटीबायोटिक था उससे बैक्टेरिया ने 10 वर्ष में ही immunity हासिल कर ली । अब अंतिम एंटीबायोटिक चल रहा है । एक बार यह एंटीबायोटिक खत्म तो फिर एलोपैथी भी खत्म । इसलिए एलोपैथी विज्ञान के और सनातन के निरंतरता के पैमाने पर खरी नहीं उतरती । दूसरी तरफ किसी भी आ...

स्वदेशी आयुर्वेदिक दंत मंजन और पूंजीवादी रसायनिक पेस्ट

1 .अगर आप रसायनिक पेस्ट जैसे कोलगेट पेप्सोडेंट के स्थान पर घर में बना आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं क्योंकि आयुर्वेदिक दंत मंजन में 30 प्रकार की जड़ी बूटियों का प्रयोग होता है यह जड़ी बूटियां विभिन्न प्रकार के पौधों और वृक्षों से से प्राप्त होती हैं | 2. अगर आप आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप किसानों को खुशहाल करते हैं क्योंकि यह जड़ी बूटियों किसी किसान के खेत से ही आएंगी। दूसरी तरफ अगर आप रसायनिक पेस्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो इनमें किसी की जड़ी बूटी का प्रयोग का प्रयोग नहीं होता रासायनिक पेस्ट में में प्रयोग होने वाले केमिकल जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट आदि बड़े बड़े पूंजीपतियों की खदानों से आते हैं । 3. आपके आयुर्वेदिक मंजन के मंजन के प्रयोग करने के कारण किसानों को विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियां जैसे नीम तुलसी आदि बीजनी पड़ेगी ।जिससे बहुत सारे जीव जंतुओं का संरक्षण होगा जोकि इन विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों पर निर्भर रहते हैं। 3. आयुर्वेदिक मंजन घर में बनाने पर आप प्लास्टिक का कचरा काम पैदा करते हैं । 4 . घर में बने हुए आयुर्...

पूंजीवादी एलोपैथी चकित्सा व्यवस्था का अंत

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एलोपैथी की उम्र बस पांच छह साल और रह गई है एलो पैथी की जान कहे जाने वाले एंटीबायोटिक का प्रभाव अब धीरे धीरे शुन्य हो चला है एक बार अगर एंटी बायोटिक एलोपैथी के हाथ से निकल गए तो एलोपैथी बेकार समझो । अगर आपका छोटा सा ऑपरेशन भी किया जाता है तो इंफेक्शन रोकने के लिए एंटीबायोटिक दिए जाते है। जब एंटीबायोटिक ही ख़त्म हो गए तो छोटे से ऑपरेशन के बाद शरीर में इंफेक्शन फैल जाएगा । जैसे हार्ट सर्जरी के बाद एंटीबायोटिक देने आवश्यक हैं । अगर आपको खांसी हो गई है तो एलोपैथी बिना एंटीबायोटिक दिए आपका इलाज नहीं कर सकती । इस तरह एलोपैथी आपका खांसी का इलाज नहीं कर पाएगी जैसे केजरीवाल की खांसी ठीक नही हुई थी । इस तरह एलोपैथी का किला ढह जाएगा । पूंजीवाद का एक मजबूत मॉडल ध्वस्त हो जाएगा । और लोगो को पुनः सनातन वैदिक चकित्सा पद्धति आयुर्वेद की ओर आना पड़ेगा ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------- सनातन माँडल के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा फेसबुक पेज  पसंद करें https://www.facebook.com/Sanatanbharat123/ या subscribe...