पूंजीपति बैंकिंग सिस्टम से होता विकास


नमस्कार मित्रों आज हम चर्चा करेंगे कि  पूंजीवादी बैंकिंग  सिस्टम से कैसे विकास हो रहा है। बैंकिंग असल में करती क्या है ?इसके लिए मैं आपको एक उदाहरण देकर समझाना चाहूंगा ।
मान लो एक देश में 10000  चावल निकालने की  सनातन चक्कियां  है। मान लो इन चक्कियों  के मालिकों ने वर्ष भर में मेहनत करके 250000 रुपया कमाया । और यह कुल 10000X250000= 250 करोड़ बैंकों में जमा करवा दिया । अब यह बैंकिंग सिस्टम करता क्या है कि यह ढाई सौ करोड़ किसी बड़ी पूंजीपति चावल निकालने वाली कंपनी XYZ LTD को उधार दे देता है ।जिससे  चावल निकालने का बहुत बड़ा प्लांट लगा सके ।अब यह XYZ लिमिटेड इन 250 करोड़  रूपए से इन 10000 चक्की वालों को खत्म कर देगी ।



अब सोचने वाली बात यह है कि यह ढाई सौ करोड़ रूपया किनका है उन  चक्की वालों का जिन्होंने इस पैसे को  बैंको में जमा करवाया और बेरोजगार कौन हुए वहीं चक्की वाले जिन्होंने यह रुपया बैंकों में जमा करवाया।
पहले जो ढाई सौ करोड रुपए का मुनाफा 10000 लोगों को होता था वह अब एक पूंजीवादी कंपनी को होगा ।


खाने के लिए पहले हम को क्या मिलता था ? चावल | बड़ी कंपनी लगने के बाद भी हमको खाने के लिए क्या  मिला ? चावल |

इसको  कहते हैं विकास। क्या आपको भी यह विकास चाहिए?
इस तरह पूंजीवादी बैंकिंग सिस्टम हमारा विकास कर रहा है वह हमारा हमारे से ही पैसे लेकर हमें ही बेरोजगार कर रही है ।

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