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पूंजीवादी कॉपीराइट और पेटेंट प्रणाली --------------------

नमस्कार मित्रों आज हम चर्चा करेंगे पूंजीवादी व्यवस्था के एक प्रमुख टूल कॉपीराइट पेटेंट के बारे में ।जैसे कि आप जानते हो कि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में अगर आप जकुछ नया अविष्कार करते हो तो उसको आप कॉपीराइट या प्रिंट करवा सकते हो। इसके बाद उस चीज का कोई भी अन्य व्यक्ति प्रयोग नहीं कर सकता। अगर वह व्यक्ति प्रयोग करता है तो उसको कॉपीराइट के मालिक

बैंकिंग सिस्टम मुद्रा कैसे छापता है ?

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अगर आपके पास 10 लाख रुपए हैं । तो आप अधिक से अधिक 10 लाख रुपए ही उधार दे सकते हो । आप किसी को 11 लाख रुपए उधार नहीं दे सकते ।लेकिन बैंकिंग में यह प्रतिबंध लागू नहीं होता । इसको हम एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। सन 2018 के अंत तक भारत में कुल मुद्रा लगभग 20 लाख करोड रुपए चल रही थी। और सारे बैंकों ने मिलाकर लगभग 60 लाख करोड रूपया उधार दे रखा था। इसका अर्थ यह हुआ कि बैंकों के पास अधिक से अधिक 20 लाख करोड रुपए की मुद्रा थी। फिर सारे बैंकों ने मिलकर 60 लाख करोड रुपए कैसे उधार दे दिए । इसी को बैंक द्वारा मुद्रा छापना कहा जाता है। देश में 2 तरीके की मुद्राएं चलती हैं। एक तो जो सरकार ने छपाई होती हैं ।और दूसरा जो बैंकों ने इस मुद्रा के अतिरिक्त जो लोन दिए होते हैं ।वह भी एक तरीके की मुद्रा ही है। इसको virtual करंसी कहते है । इससे आप वह सब काम कर सकते हैं जो सरकार द्वारा प्रिंट की गई मुद्रा से कर सकते हैं । अगर सरकार बैंकों पर यह रोक लगा दे। कि जितनी बैंक के पास मुद्रा है । बैंक उससे अधिक लोन नहीं दे सकता। तो देश की आम जनता के बारे नियारे हो जाएं । उपरोक्त उदहारण में सरकार लगभग 40 लाख कर...

सनातन प्रोसेसिंग सिस्टम और पूंजीवादी प्रोसेसिंग सिस्टम

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नमस्कार मित्रों आज हम चर्चा करेंगे सनातन प्रोसेसिंग सिस्टम और पूंजीवादी प्रोसेसिंग सिस्टम के बारे में। हम चर्चा करेंगे कि कैसे सनातन प्रोसेसिंग सिस्टम पूंजीवादी प्रोसेसिंग सिस्टम से हरेक पैमाने पर अच्छा है। सनातन प्रोसेसिंग सिस्टम कैसे उपभोक्ता के लिए भी अच्छा है और पर्यावरण के लिए भी अच्छा है। सनातन प्रोसेसिंग सिस्टम और पूंजीवादी प्रोसेसिंग सिस्टम के अंतर को जाने के लिए सबसे पहले हम एक उदाहरण लेते हैं l इस लेख को पूरी तरह समझने से लेख के साथ जो हमने चार्ट लगाया है उसे ध्यान से देखें ।  मान लो पंजाब  में एक शहर है संगरूर ।इसके इर्द गिर्द लगभग  500 व्यक्ति कुल्फी बनाने के धंधे में लगे हुए हैं। यह लोग गांव से दूध लेकर रात को जमा देते हैं और सुबह तैयार कुल्फी शुरू शहर में आकर बेच देते हैं ।इस तरह आपको ताजा कुल्फी खाने को मिलती है ।यह सनातन प्रोसेसिंग सिस्टम का एक उदाहरण है।  दूसरी तरफ पूंजीवादी प्रोसेसिंग सिस्टम में संगरूर शहर  के गावों का दूध पहले 72 किलोमीटर दूर लुधियाना में बसंत आइसक्रीम के प्लांट में ट्रकों में भर भर के भेजा जाता है ।वहां पर इस प्रोसेस...

क्या पूंजीवादी बैंकिंग सिस्टम में आपका पैसा सुरक्षित है

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पूंजीवादी बैंकिंग सिस्टम में आप के पैसे से कैसे खेला जाता हैं उसको   आज समझने का प्रयास करते हैं | अगर आप बैंक से 10 लाख रूपए का HOUSING लोन लेने जाते हो | तो बैंक कम से कम 20 लाख की जमीन गिरवीं रखेगा | पांच लाख आपको अपने पास से भी लगाने के लिए कहेगा | इस तरह बैंक के पास 35 लाख के प्रॉपर्टी गिरवीं रखने पर आपको बैंक 10 लाख रूपए का लोन देगा | हाउसिंग लोन के केस में बैंक आपकी तीन साल की RETURN , VALUATION REPORT , NON ENCUMBRANCE CERTIFICATE ,Legal Opinion , Map passed By MC आदि DOCUMENTS मांगेगा | हो सकता है इनता सब कुछ देने के बाद बैंक फिर भी हाउसिंग लोन देने से इनकार कर दे | अब आप उसी बैंक में , उसी मेनेजर के पास जाईये और उसी से 10 लाख का कार लोन मांगे | तो वह फटाफट 10 लाख रूपए का लोन आपको दे देगा वह भी बहुत थोड़े डॉक्युमेंट्स पर । कार लोन आपको बिना किसी जमीन आदि गिरवी रखने के आसानी से एक दो दिन मेहो जाता है । यदपि 10 लाख के कार की कीमत शो रूम से निकलते ही 8 लाख की रह जाती है ।क्योकि हाई एंड गाडी लोग केवल स्टेटस सिंबल के लिए लेते है | इसलिए हाई एंड सेकंड हैण्ड गाडी की कीमत ब...

पूंजीवादी बैंकिंग सिस्टम से होती गरीबों की लूट

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बैंकिंग सिस्टम पूंजीवादी अर्थव्यस्था का एक तरह का इंजन हैं | पूंजीवादी अर्थव्यस्था का मुख्य उदेश्य गरीब और माध्यम वर्ग को लूटने में पूंजीपति वर्ग की मदद करना हैं | बैंकिंग मदद से आम आदमी की लूट कैसे की जाती है उसको हम एक उधाहरण से समझते हैं | ------------------------------------------ मान लो एक देश में 30 करोड व्यक्तियों ने एक बैंक में खाता खुलवाया और हर एक व्यक्ति ने एक 1000-1000 रुपया उस बैंक में जमा करवा दिया। इस बैंक में इस तरह 30,000 करोड़ रुपया जमा हो गया। अब इस बैंक के पास एक कंपनी आई जिसका नाम है Alok Industries । अब इस बैंक ने इस कंपनी को 29500 करोड रूपया उधार दे दिया वह भी इस कंपनी के शेयर गिरवी रख कर। अब इस कंपनी ने 29500 करोड रुपए की जमीन खरीद ली वह भी₹200000 प्रति एकड़ हिसाब से । अब मान लो 1 साल बाद इन 30 करोड़ लोगों में से किसी को 1 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ गई ।उसने प्रॉपर्टी डीलरो से संपर्क किया कि मुझे 1 एकड़ जमीन चाहिए ।इसको डीलर्स ने बताया क्योंकि जमीन किसी एक को कंपनी के पास hord गई है इसलिए अब 1 एकड़ जमीन की कीमत ₹800000 प्रति एकड़ हो गई। इस सारी प्रक्रिया में क...

स्वदेशी आयुर्वेदिक दंत मंजन और पूंजीवादी रसायनिक पेस्ट

1 .अगर आप रसायनिक पेस्ट जैसे कोलगेट पेप्सोडेंट के स्थान पर घर में बना आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं क्योंकि आयुर्वेदिक दंत मंजन में 30 प्रकार की जड़ी बूटियों का प्रयोग होता है यह जड़ी बूटियां विभिन्न प्रकार के पौधों और वृक्षों से से प्राप्त होती हैं | 2. अगर आप आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप किसानों को खुशहाल करते हैं क्योंकि यह जड़ी बूटियों किसी किसान के खेत से ही आएंगी। दूसरी तरफ अगर आप रसायनिक पेस्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो इनमें किसी की जड़ी बूटी का प्रयोग का प्रयोग नहीं होता रासायनिक पेस्ट में में प्रयोग होने वाले केमिकल जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट आदि बड़े बड़े पूंजीपतियों की खदानों से आते हैं । 3. आपके आयुर्वेदिक मंजन के मंजन के प्रयोग करने के कारण किसानों को विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियां जैसे नीम तुलसी आदि बीजनी पड़ेगी ।जिससे बहुत सारे जीव जंतुओं का संरक्षण होगा जोकि इन विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों पर निर्भर रहते हैं। 3. आयुर्वेदिक मंजन घर में बनाने पर आप प्लास्टिक का कचरा काम पैदा करते हैं । 4 . घर में बने हुए आयुर्...
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जीडीपी की सच्चाई ---- मान लो एक शहर में 1000 सब्जी विक्रेता है। वह 1 साल में सब्जी बेचकर 2-2 लाख कमा लेते हैं ।लेकिन वे देश की जीडीपी में कोई भी योगदान नहीं देगें क्योंकि उनकी आय सरकार की किसी बही खाते मे दर्ज नहीं होती। मान लो अगर उसी शहर में एक Reliance Fresh की दुकान खुलती है ,जो कि सब्जी भी बेचती है । धीरे धीरे वह दुकान 1000 सब्जी वालों को खत्म कर देती है ,और साल में 2000 लाख रुपया कमा लेती है ।तो देश की जीडीपी 2000 लाख रुपया बढ़ जाएगी। ---- इस तरह हमने देखा की कैसे अगर बड़ी पूंजीवादी कंपनीज़ आमदनी बढ़ती है ,तो देश की जीडीपी ही बढ़ जाएगी ,और अगर गरीब की आमदन बढ़ती है तो जीडीपी कम हो जाएगी। --- यह जीडीपी का प्रोपेगेंडा पूंजीवादी Information Warfare की आंकड़ों की बाजीगरी है ,और कुछ भी नहीं। पूंजीवादी कंपनीज की आमदन के बढ़ने को विकास ,GDP Growth कहते हैं । --- पूंजीवादी व्यवस्था, वह व्यवस्था है जो कि देश के सारे संसाधन और धन लूटकर चंद व्यक्तियों तक सीमित कर देती है। इसके विपरीत सनातन अर्थव्यवस्था यह यकीनी बनाती है कि देश के संसाधनों और धन की समान बां...

धर्मस्य मूलः अर्थ

चाणक्य ने कहा है कि धर्म का मूल अर्थ और अर्थ का मूल राज्य है I सोचने वाली बात क्या है कि यहां पर अर्थ का मतलब क्या है । इस सूत्र में अर्थ से अभिप्राय है अर्थ तंत्र I किसी भी धर्म को बचाने के लिए उस देश का अर्थतंत्र उस धर्म को शूट  करना चाहिए । जैसे कि सनातन वैदिक धर्म की पालना के लिए संस्कृत और गाय अत्यंत आवश्यक है ।लेकिन इसलिए गाय और संस्कृत का संरक्षण तभी हो सकता है ।जब गाय और संस्कृत की जरूरत हो ।आजकल की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में गाय और संस्कृत की कोई जरूरत नहीं है। गाय और संस्कृत की जरूरत केवल सनातन अर्थव्यवस्था में पढ़ती है ।उदाहरण के लिए हम पूंजीवादी एलोपैथिक सिस्टम और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को देख लेते हैं। एलोपैथी का चिकित्सा प्रणाली में एलोपैथी की सारी पुस्तकें इंग्लिश भाषा में लिखी हुई है , और एलोपैथिक का जन्म भी भारत से बाहर हुआ है ।अगर हम एलोपैथिक चिकित्सा प्रणाली को आगे बढ़ाते हैं तो इसके लिए संस्कृत की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। भारत की सरकार अपने हेल्थ बजट का लगभग 98   प्रतिशत पूंजीवादी एलोपैथिक अवस्था पर खर्च करती है   दूसरी तरफ आयुर्वेदिक चिकित्स...

पूंजीपति बैंकिंग सिस्टम से होता विकास

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नमस्कार मित्रों आज हम चर्चा करेंगे कि  पूंजीवादी बैंकिंग  सिस्टम से कैसे विकास हो रहा है। बैंकिंग असल में करती क्या है ?इसके लिए मैं आपको एक उदाहरण देकर समझाना चाहूंगा । मान लो एक देश में 10000  चावल निकालने की  सनातन चक्कियां  है। मान लो इन चक्कियों  के मालिकों ने वर्ष भर में मेहनत करके 250000 रुपया कमाया । और यह कुल 10000X250000= 250 करोड़ बैंकों में जमा करवा दिया । अब यह बैंकिंग सिस्टम करता क्या है कि यह ढाई सौ करोड़ किसी बड़ी पूंजीपति चावल निकालने वाली कंपनी XYZ LTD को उधार दे देता है ।जिससे  चावल निकालने का बहुत बड़ा प्लांट लगा सके ।अब यह XYZ लिमिटेड इन 250 करोड़  रूपए से इन 10000 चक्की वालों को खत्म कर देगी । अब सोचने वाली बात यह है कि यह ढाई सौ करोड़ रूपया किनका है उन  चक्की वालों का जिन्होंने इस पैसे को  बैंको में जमा करवाया और बेरोजगार कौन हुए वहीं चक्की वाले जिन्होंने यह रुपया बैंकों में जमा करवाया। पहले जो ढाई सौ करोड रुपए का मुनाफा 10000 लोगों को होता था वह अब एक पूंजीवादी कंपनी को होगा । खाने के लिए पहले ह...

सनातन मिश्रित खेती और आज की पूंजीवादी खेती

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नमष्कार मित्रों आज हम चर्चा करेंगे ।कि कैसे सनातन मिश्रित खेती पूंजीवादी खेती से हरेक पैमाने पर अच्छी है ।पूंजीवादी खेती की तुलना में मिश्रित खेती किसान के लिए भी अधिक उपयोगी है ।और उपभोक्ता के लिए भी अधिक उपयोगी है। हम चर्चा करेंगे कि क्यों और कैसे पूंजीवादी खेती के कारण किसान केवल और केवल सरकार और पूंजीवादी कम्पनीओं पर निर्भर हो रहा है। और मिश्रित खेती किसान को  कैसे आत्महत्या से  बचा सकती है। और मिश्रित खेती से उपभोक्ता को कैसे सही दाम पर रसायन रहित उत्पादन मिल सकता है | आजकल जो खेती की जा रही है। उसमें एक स्थान पर केवल एक ही तरह की फसल उगाई जाती है ।जैसे कि पंजाब में केवल धान और गेहूं की फसल ही उगाई जाती है ।पूंजीवादी खेती का मूल मंत्र है ।कि किसान अपनी सारी की सारी फसल बाजार में बेचे ।और अपनी जरूरत का सारा समान बाजार से खरीदे ।जैसे कि अगर किसान धान और गेहूं बेचता है। तो उसको सब्जी,दालें,सरसों का तेल,मूंगफली,ज्वार बाजरा,मक्की आदि बाजार से खरीदने पड़ते हैं ।जबकि मिश्रित  खेती में किसान अपने घर की जरूरत का अधिकतर समान जैसे दाल,सब्जी आदि खुद ही बीजता था । और जो फसल अध...